ब्रह्मांड में कुछ भी स्थिर नहीं है। जैसे हम पृथ्वी पर चलते हैं, वैसे ही ग्रह, तारे और आकाशगंगाएं एक अदृश्य शक्ति के तहत ब्रह्मांडीय नृत्य (Cosmic Dance) कर रही हैं। लेकिन क्या ग्रह पूरी तरह गोल घूमते हैं? गति कहां बदलती है? इसे समझने के लिए हमें ऑर्बिटल मैकेनिक्स की गहराइयों में उतरना होगा।

दीर्घवृत्ताकार कक्षाएं (Elliptical Orbits)
बचपन में हमें सिखाया जाता है कि ग्रह गोल कक्षा में घूमते हैं। लेकिन जोहान्स केप्लर ने 17वीं सदी में यह साबित कर दिया कि ग्रहों की कक्षा पूरी तरह गोल (Circular) नहीं होती, बल्कि यह हल्की अंडाकार होती है, जिसे दीर्घवृत्त (Ellipse) कहते हैं। सूर्य बीच में नहीं बल्कि दीर्घवृत्त के एक फोकस (Focus Point) पर मौजूद होता है।
रहस्यमय गतिवर्धन (The Sling-Shot Effect)
केप्लर के दूसरे नियम के अनुसार, जब कोई ग्रह सूर्य के सबसे करीब पहुंचता है (Perihelion), तो वह गुरुत्वाकर्षण के कारण अत्यंत तेज़ी से ट्रैवल करने लगता है। लेकिन जैसे ही वह दूर जाता है (Aphelion), उसकी गति धीरे हो जाती है। इसी सिद्धांत का उपयोग करके वैज्ञानिक हमारे अंतरिक्ष यानों (Spacecraft) को दूसरे ग्रहों की ग्रेविटी खींचकर आगे फेंकने (Slingshot / Gravity Assist) के लिए करते हैं।
एस्केप वेलोसिटी और कक्षाएं
किसी कक्षा (Orbit) में बने रहने के लिए गति (Velocity) और गुरुत्वाकर्षण (Gravity) का परफेक्ट संतुलन चाहिए। यदि ग्रह की गति बहुत कम हो जाए, तो वह सीधा सूर्य में गिर जाएगा। इसी गणित का उपयोग सैटेलाइट (Satellites) को लॉन्च करने में भी होता है।
क्या आप जानते हैं?
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) लगातार पृथ्वी की ओर गिर रहा है, लेकिन यह इतनी तेज़ क्षैतिज गति (Horizontal Speed - 28,000 km/h) से उड़ रहा है कि यह पृथ्वी की गोलाई को पार कर जाता है। इसे ही ऑर्बिटिंग (Orbiting) कहते हैं!




