जब आप एक गेंद को हवा में उछालते हैं, तो वह कुछ ऊंचाई तक जाती है और फिर गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के कारण वापस नीचे गिर जाती है। लेकिन अगर आप गेंद को इतनी ज़ोर से फेंकें कि वह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को पार कर अंतरिक्ष में चली जाए और कभी वापस न आए? जिस न्यूनतम रफ्तार (Minimum Speed) पर ऐसा होता है, उसे ही पलायन वेग (Escape Velocity) कहा जाता है।
यह काम कैसे करता है?
किसी भी ग्रह या तारे से बाहर निकलने के लिए, एक अंतरिक्ष यान (Spacecraft) की गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) को उस ग्रह की गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा (Gravitational Potential Energy) को पार करना होता है। यह ग्रह के द्रव्यमान (Mass) और उसकी त्रिज्या (Radius) पर निर्भर करता है। जितना भारी और घना ग्रह होगा, उसका पलायन वेग उतना ही अधिक होगा।

विभिन्न ग्रहों का पलायन वेग
हर ग्रह का अपना अलग पलायन वेग होता है, जिसे मापना रॉकेट लॉन्च करने के लिए बेहद ज़रूरी है:
- पृथ्वी (Earth): लगभग 11.2 किलोमीटर प्रति सेकंड (40,270 किमी/घंटा)। हमें अंतरिक्ष में जाने के लिए रॉकेट को कम से कम इतनी रफ्तार देनी पड़ती है।
- चाँद (Moon): केवल 2.4 किलोमीटर प्रति सेकंड। इसीलिए अपोलो मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों को चाँद से वापस आने के लिए बहुत बड़े रॉकेट की ज़रूरत नहीं पड़ी।
- बृहस्पति (Jupiter): सौरमंडल का सबसे भारी ग्रह। इसका पलायन वेग बहुत अधिक, लगभग 59.5 किलोमीटर प्रति सेकंड है!
- सूर्य (Sun): सूर्य का गुरुत्वाकर्षण इतना प्रचंड है कि इसके सतह से बाहर निकलने के लिए 615 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार चाहिए।
ब्लैक होल का चरम रहस्य
क्या आपने कभी सोचा है कि ब्लैक होल (Black Hole) को 'ब्लैक' क्यों कहा जाता है? ऐसा इसलिए है क्योंकि एक ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण इतना ज़्यादा होता है कि इसका पलायन वेग प्रकाश की गति (3,00,000 किमी/सेकंड) से भी अधिक हो जाता है! चूंकि ब्रह्मांड में कोई भी चीज़ प्रकाश से तेज़ नहीं चल सकती, इसलिए प्रकाश (Light) भी ब्लैक होल से बाहर नहीं निकल पाता।










