VENUS

शुक्र ग्रह (Venus) सौरमंडल का सबसे गर्म और ख़तरनाक ग्रह है। आकार में यह पृथ्वी की जुड़वां बहन जैसा है, लेकिन इसका वातावरण ज़हरीले बादलों और भयंकर गर्मी से भरा हुआ है।

दिन (Day)243 पृथ्वी दिन
रेडियस (Radius)6,051 किमी
चाँद (Moons)0 (शून्य)
औसत तापमान475°C
शुक्र ग्रह (Venus Planet) Visual 1शुक्र ग्रह (Venus Planet) Visual 2शुक्र ग्रह (Venus Planet) Visual 3
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नर्क जैसा ग्रह

शुक्र ग्रह को अक्सर हमारी पृथ्वी की "जुड़वां बहन" (Twin Sister) कहा जाता है क्योंकि इसका आकार, द्रव्यमान (mass) और घनत्व बिल्कुल हमारी पृथ्वी के ही समान है।

लेकिन यह बहन काफी क्रूर और जानलेवा है! एक समय वैज्ञानिकों को लगता था कि यहाँ जीवन हो सकता है, लेकिन आज हम जानते हैं कि यह पूरे सौरमंडल का सबसे भयानक और नर्क जैसा ग्रह है जहाँ का वातावरण किसी भी जीव को सेकंडों में खतम कर देगा।

Hellish Venus Surface
Venus Greenhouse Effect
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सबसे गर्म ग्रह

दिलचस्प बात यह है कि सूरज के सबसे नज़दीक होने के बावजूद बुध (Mercury) सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह नहीं है। यह खिताब शुक्र (Venus) के पास है।

शुक्र के वायुमंडल में 96% से ज़्यादा कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide) गैस मौजूद है। यह गैस एक मोटे कंबल की तरह काम करती है जो सूरज की गर्मी को अंदर तो आने देती है, लेकिन वापस बाहर अंतरिक्ष में नहीं निकलने देती। इस 'भगोड़े ग्रीनहाउस प्रभाव' (Runaway Greenhouse Effect) के कारण यहाँ का तापमान 475°C तक रहता है—इतना गर्म कि भारी धातु 'सीसा' (Lead) भी पिघलकर पानी बन जाए।

Acid Clouds

ज़हरीले बादल

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सफ़ेद और सुंदर दिखने वाला यह ग्रह असल में गहरे पीले रंग के बादलों से ढका है। ये बादल पानी के नहीं, बल्कि सल्फ्यूरिक एसिड (तेज़ाब) के बने हैं!

इन बादलों से लगातार जानलेवा तेज़ाब की बारिश होती रहती है। लेकिन मज़े की बात तो ये है कि यहाँ की ज़मीन इतनी भयंकर रूप से गर्म है कि तेज़ाब की बूंदें ज़मीन पर गिरने से कई किलोमीटर बहुत पहले ही भाप (evaporate) बनकर फिर से उड़ जाती हैं।

Venus Rotation
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सूरज पश्चिम से उगता है

पूरे सौरमंडल में केवल दो ग्रह ऐसे हैं जो विपरीत (उल्टी) दिशा में घूमते हैं: शुक्र और अरुण (Uranus)। हमारी पृथ्वी जहाँ पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, वहीं शुक्र पूर्व से पश्चिम की ओर अपनी धुरी (axis) पर घूमता है, जिसे Retrograde Rotation कहते हैं।

अगर आप किसी तरह शुक्र के घने बादलों को चीर कर उस नर्क की ज़मीन पर ज़िंदा खड़े रह पायें, तो आपको वहां सूरज पश्चिम (West) से उगता हुआ और पूर्व (East) में डूबता हुआ दिखाई देगा!

Slow Rotation
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दिन, साल से भी बड़ा

उल्टी दिशा में घूमने के साथ-साथ यह ब्रह्मांड का सबसे आलसी ग्रह भी है। शुक्र अपनी धुरी पर इतनी धीमी गति से घूमता है कि इसे अपना एक चक्कर पूरा करने में पूरे 243 पृथ्वी-दिन लग जाते हैं।

जबकि सूरज का एक चक्कर (एक वर्ष) ये महज़ 225 पृथ्वी-दिनों में पूरा कर लेता है। इसका अनोखा मतलब यह निकलता है कि शुक्र ग्रह पर उसका एक दिन, उसके एक साल से भी ज़्यादा लंबा होता है!

Crushing Pressure

कुचल देने वाला दबाव

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अगर आप कैसे भी करके शुक्र की भयंकर गर्मी से बच जाएँ, तो वहाँ का दबाव (Atmospheric Pressure) आपको बचने नहीं देगा।

शुक्र पर हवा का दबाव पृथ्वी की तुलना में 90 गुना ज़्यादा भारी है! यह दबाव बिल्कुल वैसा ही है जैसा पृथ्वी पर पानी के अंदर 1 किलोमीटर (3000 फीट) गहराई में महसूस होता है। यहाँ खड़ा कोई भी इंसान सेकेंडों के भीतर एक खाली कैन (crushed can) की तरह पिचक कर ख़त्म हो जाएगा।

Venus Volcanoes
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ज्‍वालामुखियों की दुनिया

रडार (Radar) स्कैनिंग से पता चला है कि शुक्र की सतह पर हमारी पूरी आकाशगंगा के किसी भी ग्रह से सबसे ज़्यादा ज्वालामुखी (Volcanoes) मौजूद हैं।

यहाँ 1 लाख से ज़्यादा छोटे-बड़े ज्वालामुखी फैले हुए हैं, जिनमें से बहुत सारे अभी भी जीवित (Active) हैं और लगातार ज़हरीली गैसें उगल रहे हैं। शुक्र की सतह पर हर तरफ सिर्फ पिघले हुए लावे की नदियाँ और कठोर बेसाल्ट चट्टानें ही दिखाई देती हैं।

Soviet Venera Mission
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रूस का वेनेरा मिशन

इतने ख़तरनाक ग्रह पर जाना नामुमकिन सा लगता है, लेकिन शीत-युद्ध (Cold War) के दौरान सोवियत संघ (रूस) ने यह कमाल कर दिखाया।

उनके शक्तिशाली 'Venera' (वेनेरा) रोवर्स ने शुक्र की धरती पर ऐतिहासिक लैंडिंग की। हालाँकि वहां के विनाशकारी दबाव और पिघला देने वाली गर्मी ने उन रोबोट्स को महज़ दो घंटों के अंदर ही पिघलाकर हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया, लेकिन ख़त्म होने से पहले वेनेरा ने शुक्र की ज़मीन की पहली और इकलौती असली तस्वीरें पृथ्वी तक भेज दीं!

Life in Venus Clouds

क्या शुक्र पर जीवन हो सकता है?

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भले ही इसकी सतह नर्क जैसी है, लेकिन शुक्र की ज़मीन से 50 किलोमीटर ऊपर, बादलों के बीच का वातावरण रहस्यमय रूप से काफी शांत है।

हाल ही में वैज्ञानिकों ने शुक्र के इन बादलों में 'फॉस्फीन' (Phosphine) नाम की एक गैस की खोज की है। पृथ्वी पर यह गैस केवल सूक्ष्म जीवों (Microbes) द्वारा बनाई जाती है। इस खोज ने विज्ञान जगत में तहलका मचा दिया है क्योंकि इसका मतलब हो सकता है कि शुक्र के उन घने बादलों के बीच कोई एलियन जीवन पनप रहा है!

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