Quantum physics in hindi | जानिए क्वांटम फिजिक्स क्या है ?

हमारी कई सालों की मेहनत के बाद आज हम यूनिवर्स यानी ब्रह्मांड की कुछ बातें समझने के काबिल हो चुके हैं। जैसे नए नए ग्रहों की खोज, सूरज का अस्त होना इत्यादि। लेकिन फिर भी हमारे यूनिवर्स में अनेक खोजें है जिसे कोई समझा नहीं सका है। ऐसा ही एक विज्ञान का क्षेत्र है जो उलझन से बरा हौआ है जो है क्वांटम फिजिक्स, जिसका ब्रह्मांड में भी उपयोग होता रहता है और हमारे जीवन में भी। लेकिन इसे समझ पाना अभी तक काफी मुश्किल ही बना हुआ  है। लेकिन अगर आप भौतिक विज्ञान यानी Physics में रुचि रखते हैं और इस मुश्किल लगने वाले विषय के बारे कुछ समझना चाहते हैं तो यह लेख पुरा पढें। आज हम बात करेंगे Quantum physics in Hindi 

क्वांटम फिजिक्स क्या है /  What is Quantum Physics in Hindi 

क्वांटम फिजिक्स, फिजिक्स का वह हिस्सा है जिसमें बहुत छोटे कणों जैसे मॉलिक्यूल ( molecule ), ऐटम, इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन, जैसे सबअटॉमिक कणों को समझा जाता है। क्वांटम फिजिक्स बीसवीं सदी का सबसे रोचक सिद्धार्था था। जिसे क्वांटम मैकेनिक्स / Quantum Mechanics और क्वांटम फील्ड थ्योरी / Quantum field theory भी कहा जाता है।
क्वांटम फिजिक्स की खोज कब और कैसे हुई ?
14 सितंबर 1900 को मैक्स प्लांक ने क्वांटम फिजिक्स की नींव डाली थी। उन्होंने ब्लैक बॉडी रेडिएशन पर सर्च करके यह परिकल्पना दी की प्रकाश और अन्य विद्युत चुंबकीय विकिरण ऊर्जा (Magnetic Field ) का प्रवाह ना होकर ऊर्जा छोटे-छोटे हिस्से में चलती है। क्वांटम फिजिक्स को स्थापित करने के लिए प्लांक को नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया था। इसे सोच ने फिजिक्स के क्षेत्र में क्रांति ला दी थी और इसी परिकल्पना को समझ कर ही महान विज्ञानिक रह चुके आइंस्टाइन ने प्रकाश विद्युत प्रभाव को समझा था। 

क्वांटम क्या है / Quantum in hindi 

मैक्स प्लांक द्वारा बनाए गए उर्जा के छोटे छोटे पैकेट को क्वांटा कहते है और हर क्वांटा की उर्जा निष्य होती है। यह प्रकाश की आवृत्ति ( frequency ) पर निर्भर करती है। इसका फार्मूला है :
E = HV
जहां H प्लांक constant है और V का मतलब होता है आवृत्ति ( frequency )। 
क्वांटम फिजिक्स हमारी जींदगी में किस तरह इस्तेमाल होती है? 
हमारी जिंदगी में जो कुछ भी होता है उसमें क्वांटम फिजिक्स का कहीं ना कहीं महत्व होता है। जैस मोबाइल फोन, डिजिटल कैमरा और एल.ई.डी ( LED ) क्वांटम फिजिक्स की ही देन है।  टेलीकम्यूनिकेशन को आसान बनाने में और आज की जरूरत बन चुके  GPS  ” ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम ” को भी क्वांटम फिजिक्स द्वारा बनाया गया है। अब  जानते हैं क्वांटम फिजिक्स से जुड़ी धारणा कौन-कौन सी हैं।
1.  डुएल नेचर ( Dual nature)
यूनिवर्स मे सब कुछ कणों और तरंगों के रूप में होता है। Dual Nature Theory का मानना है कि ब्रह्मांड की हर चीज एक ही समय पर कण भी होती है और तरंगों के रूप में रहती है। इसका अर्थ यह है कि क्वांटम फिजिक्स के अनुसार यूनिवर्स की हर वस्तु में कुछ कण पार्टिकल्स के होते हैं और कुछ कण तरंगे होती है। यानी कि इलेक्ट्रॉन एक ही समय में पर कण / particle भी है और तरंग / wave भी है।
2.  अनसर्टेंटी एंड प्रोबेबिलिटी ( Uncertainity and probability )
अनसर्टेंटी एंड प्रोबेबिलिटी क्वांटम फिजिक्स की बहुत महत्वपूर्ण बात है। क्वांटम की दुनिया में बहुत छोटे पार्टिकल्स पाए जाते हैं यानी इलेक्ट्रॉन और फोटोन और इस क्वांटम की दुनिया में किसी भी घटना के होने की संभावना 100% नहीं होती यानी कभी भी कोई भी घटना हो सकती है इसके अलावा क्वांटम पार्टिकल्स की एक ही समय पर जगह और ऊर्जा जानना भी असंभव होता है। कब कौन सा पार्टिकल किस जगह में होगा और किस स्थति में होगा यह नहीं कहा जा सकता अंत पार्टिकल की स्थति परिवर्तनशील बनी रहती है।
3.  क्वांटम इनटैगलमैंट ( Quantum Entanglement )
क्वांटम इन्टैक्ग पार्टिकल ऐसे पार्टिकल्स होते हैं जिनके गुण आपस में उलझे हुए रहते है। ऐसे में जब किसी एक के ऊपर कोई भी क्रिया की जाती है तो दूसरे इन्टैक्ग पार्टिकल्स पर उसका प्रभाव होता है। पार्टिकल के बीच दूरी बढ़ा देने के बाद भी यह प्रभाव बना रहता है। इसका प्रभाव इतना ज्यादा होता है कि इन्टैक्ग पार्टिकल्स अगर दूसरे ग्रह पर भी हो तो भी एक पार्टिकल की प्रक्रिया करने पर दूसरा प्रभावित जरूर होगा। साइंटिस्ट आइंस्टीन के लिए भी इसे मानना आसान नहीं रहा था। लेकिन आइंस्टीन के अनुसार यह दुनिया असल मे होती है और इससे जुड़े जितने भी शोध किए जाते हैं उनका जवाब सतीक मिलता है। 

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